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ramayan 1.38.5: महाराज सगर अपनी दोनों पत्नियों के साथ हिमालय पर जाकर भृगुप्रस्रवण नामक शिखर पर तपस्या करने लगे॥5॥   |   ramayan सर्ग 1.38: राजा सगर के पुत्रों की उत्पत्ति तथा यज्ञ की तैयारी   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 38: राजा सगर के पुत्रों की उत्पत्ति तथा यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.38.5 
ताभ्यां सह महाराज: पत्नीभ्यां तप्तवांस्तप:।
हिमवन्तं समासाद्य भृगुप्रस्रवणे गिरौ॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज सगर अपनी दोनों पत्नियों के साथ हिमालय पर जाकर भृगुप्रस्रवण नामक शिखर पर तपस्या करने लगे॥5॥
 
‘Maharaja Sagara along with his two wives went to the Himalayas and began performing tapasya on a peak called Bhriguprasravan.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)