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ramayan 1.38.21-22h: 'जब वह ऐसे पाप कर्मों में लिप्त होकर पुण्यात्माओं को कष्ट देने लगा तथा नगर के नागरिकों को हानि पहुँचाने लगा, तो उसके पिता ने उसे नगर से निकाल दिया।   |   ramayan सर्ग 1.38: राजा सगर के पुत्रों की उत्पत्ति तथा यज्ञ की तैयारी   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 38: राजा सगर के पुत्रों की उत्पत्ति तथा यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  1.38.21-22h 
एवं पापसमाचार: सज्जनप्रतिबाधक:॥ २१॥
पौराणामहिते युक्त: पित्रा निर्वासित: पुरात्।
 
 
अनुवाद
'जब वह ऐसे पाप कर्मों में लिप्त होकर पुण्यात्माओं को कष्ट देने लगा तथा नगर के नागरिकों को हानि पहुँचाने लगा, तो उसके पिता ने उसे नगर से निकाल दिया।
 
'When he began to torment the virtuous and harm the citizens of the city by being involved in such sinful acts, his father expelled him from the city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)