Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.38.20-21h: 'हे पुरुषश्रेष्ठ रघुनन्दन! सगर का ज्येष्ठ पुत्र असमंज नगर के बालकों को पकड़कर सरयू के जल में फेंक देता था और जब वे डूबने लगते थे, तब वह उनकी ओर देखकर हंसता था। | ramayan सर्ग 1.38: राजा सगर के पुत्रों की उत्पत्ति तथा यज्ञ की तैयारी । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स च ज्येष्ठो नरश्रेष्ठ सगरस्यात्मसम्भव:।
बालान् गृहीत्वा तु जले सरय्वा रघुनन्दन॥ २०॥
प्रक्षिप्य प्राहसन्नित्यं मज्जतस्तान् निरीक्ष्य वै।
अनुवाद
'हे पुरुषश्रेष्ठ रघुनन्दन! सगर का ज्येष्ठ पुत्र असमंज नगर के बालकों को पकड़कर सरयू के जल में फेंक देता था और जब वे डूबने लगते थे, तब वह उनकी ओर देखकर हंसता था।
'O best of men, Raghunandan! Sagara's eldest son Asamanja used to catch the children of the city and throw them into the waters of Sarayu and when they started drowning, he used to look at them and laugh.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥