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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 38: राजा सगर के पुत्रों की उत्पत्ति तथा यज्ञ की तैयारी  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.38.2 
अयोध्याधिपतिर्वीर पूर्वमासीन्नराधिप:।
सगरो नाम धर्मात्मा प्रजाकाम: स चाप्रज:॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! बहुत समय पहले की बात है, अयोध्या में सगर नाम के एक धर्मात्मा राजा राज्य करते थे। उनके कोई पुत्र नहीं था; इसलिए वे सदैव पुत्र प्राप्ति के लिए उत्सुक रहते थे॥ 2॥
 
‘Valiant! It is a long time ago that a righteous king named Sagar ruled Ayodhya. He had no son; hence he was always eager to have a son.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)