Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.37.32: ककुत्स्थ! जो मनुष्य इस पृथ्वी पर कार्तिकेय के प्रति भक्ति रखता है, वह मृत्यु के पश्चात् इस लोक में दीर्घायु होकर तथा पुत्र-पौत्रादि से युक्त होकर स्कन्द लोक को जाता है। | ramayan सर्ग 1.37: गंगा से कार्तिकेय की उत्पत्ति का प्रसंग । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ककुत्स्थ! जो मनुष्य इस पृथ्वी पर कार्तिकेय के प्रति भक्ति रखता है, वह मृत्यु के पश्चात् इस लोक में दीर्घायु होकर तथा पुत्र-पौत्रादि से युक्त होकर स्कन्द लोक को जाता है।
Kakutstha! The person who has devotion towards Karthikeya on this earth, after his death, goes to the world of Skanda, having a long life in this world and being blessed with sons and grandchildren.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे सप्तत्रिंश: सर्ग:॥ ३७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें सैंतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥