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ramayan 1.37.13: अग्निदेव के ये वचन सुनकर गंगादेवी ने दिव्य रूप धारण किया। उनकी महानता और शोभा देखकर अग्निदेव ने उनके चारों ओर रुद्रतेज बिखेर दिए॥13॥   |   ramayan सर्ग 1.37: गंगा से कार्तिकेय की उत्पत्ति का प्रसंग   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 37: गंगा से कार्तिकेय की उत्पत्ति का प्रसंग  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.37.13 
इत्येतद् वचनं श्रुत्वा दिव्यं रूपमधारयत्।
स तस्या महिमां दृष्ट्वा समन्तादवशीर्यत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
अग्निदेव के ये वचन सुनकर गंगादेवी ने दिव्य रूप धारण किया। उनकी महानता और शोभा देखकर अग्निदेव ने उनके चारों ओर रुद्रतेज बिखेर दिए॥13॥
 
Hearing these words of Agnidev, Gangadevi assumed a divine form. Seeing her greatness and splendor, Agnidev scattered the Rudra Tejas all around her.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)