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ramayan 1.37.12: तब देवताओं से 'बहुत अच्छा' कहकर अग्निदेव गंगाजी के पास आए और बोले - 'देवि! आप इस बालक को ले जाएँ। यह देवताओं का प्रिय कार्य है।'॥12॥   |   ramayan सर्ग 1.37: गंगा से कार्तिकेय की उत्पत्ति का प्रसंग   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 37: गंगा से कार्तिकेय की उत्पत्ति का प्रसंग  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.37.12 
देवतानां प्रतिज्ञाय गंगामभ्येत्य पावक:।
गर्भं धारय वै देवि देवतानामिदं प्रियम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तब देवताओं से 'बहुत अच्छा' कहकर अग्निदेव गंगाजी के पास आए और बोले - 'देवि! आप इस बालक को ले जाएँ। यह देवताओं का प्रिय कार्य है।'॥12॥
 
Then saying 'very good' to the gods, Agnidev came near Gangaji and said - 'Goddess! You should carry this child. This is the favourite work of the gods.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)