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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना
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श्लोक 25
श्लोक
1.36.25
तान् सर्वान् पीडितान् दृष्ट्वा सुरान् सुरपतिस्तदा।
गमनायोपचक्राम दिशं वरुणपालिताम्॥ २५॥
अनुवाद
'उमादेवी के शाप से पीड़ित उन समस्त देवताओं को देखकर भगवान शिव उस समय पश्चिम दिशा की ओर चले गए ॥25॥
'Seeing all those gods suffering from the curse of Umadevi, Lord Shiva at that time moved towards the west. 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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