श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.36.18 
तदग्निना पुनर्व्याप्तं संजातं श्वेतपर्वतम्।
दिव्यं शरवणं चैव पावकादित्यसंनिभम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जब अग्नि ने उसे घेर लिया, तब वह तेज श्वेत पर्वत के रूप में परिवर्तित हो गया। साथ ही वहाँ दिव्य सरकण्डों का एक वन भी प्रकट हुआ, जो अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी प्रतीत होता था॥18॥
 
‘When the fire engulfed it, that radiance transformed into a white mountain. Along with that a forest of divine reeds also appeared there, which appeared as radiant as the fire and the sun.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)