श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.36.17 
ततो देवा: पुनरिदमूचुश्चापि हुताशनम्।
आविश त्वं महातेजो रौद्रं वायुसमन्वित:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब देवताओं ने अग्निदेव से कहा - 'अग्नि! आप वायु की सहायता से भगवान शिव के इस महान तेज को अपने भीतर धारण करें।'॥17॥
 
‘Then the gods said to Agnidev - 'Agni! With the help of Vayu you keep this great brilliance of Lord Shiva within you.'॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)