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ramayan 1.36.14: "किन्तु हे देवश्रेष्ठ! यदि मेरा यह श्रेष्ठ वीर्य उत्तेजित होकर अपने स्थान से फिसल जाए, तो इसे कौन धारण करेगा? यह मुझे बताओ।"   |   ramayan सर्ग 1.36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.36.14 
यदिदं क्षुभितं स्थानान्मम तेजो ह्यनुत्तमम्।
धारयिष्यति कस्तन्मे ब्रुवन्तु सुरसत्तमा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
"किन्तु हे देवश्रेष्ठ! यदि मेरा यह श्रेष्ठ वीर्य उत्तेजित होकर अपने स्थान से फिसल जाए, तो इसे कौन धारण करेगा? यह मुझे बताओ।"
 
"But, O best of the gods! If this best of my semen gets agitated and slips from its place, then who will hold it? Tell me this."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)