श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 36: देवताओं का शिव-पार्वती को सुरतक्रीडा से निवृत्त करना तथा उमादेवी का देवताओं और पृथ्वी को शाप देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.36.13 
धारयिष्याम्यहं तेजस्तेजसैव सहोमया।
त्रिदशा: पृथिवी चैव निर्वाणमधिगच्छतु॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'देवताओं! मैं उमा सहित अर्थात् हम दोनों ही अपनी-अपनी महिमा से शोभा धारण करेंगे। पृथ्वी आदि समस्त लोकों के निवासी शांति का आनंद लें।' 13॥
 
'Gods! I along with Uma, that is, both of us, will wear the glory with our own glory. May the inhabitants of all the worlds like Earth enjoy peace. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)