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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 35: विश्वामित्र आदि का गंगाजी के तट पर रात्रिवास करना, गंगाजी की उत्पत्ति की कथा
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श्लोक 6
श्लोक
1.35.6
एवमुक्ता महर्षयो विश्वामित्रेण धीमता।
पश्यन्तस्ते प्रयाता वै वनानि विविधानि च॥ ६॥
अनुवाद
बुद्धिमान विश्वामित्र की यह बात सुनकर वे महामुनि नाना प्रकार के वनों की शोभा देखते हुए वहाँ से चले गए॥6॥
Hearing this from the wise Vishwamitra, the great sage departed from there, seeing the beauty of the different types of forests. 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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