| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 1: बाल काण्ड » सर्ग 34: गाधि की उत्पत्ति, कौशिकी की प्रशंसा » श्लोक 9 |
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| | | | श्लोक 1.34.9  | दिव्या पुण्योदका रम्या हिमवन्तमुपाश्रिता।
लोकस्य हितकार्यार्थं प्रवृत्ता भगिनी मम॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | मेरी वह बहन जगत के हित के लिए हिमालय में शरण लेकर नदी के रूप में प्रवाहित हुई। वह पवित्र, दिव्य नदी अत्यंत सुंदर है॥9॥ | | | | That sister of mine, for the benefit of the world, took shelter in the Himalayas and flowed in the form of a river. That holy, divine river is very beautiful.॥ 9॥ | | ✨ ai-generated | | |
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