श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 34: गाधि की उत्पत्ति, कौशिकी की प्रशंसा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.34.8 
सशरीरा गता स्वर्गं भर्तारमनुवर्तिनी।
कौशिकी परमोदारा प्रवृत्ता च महानदी॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सत्यवती अपने पति के पीछे-पीछे सशरीर स्वर्ग को चली गई। वही अत्यंत उदार नदी कौशिकी के रूप में प्रकट होकर इस पृथ्वी पर बहती है॥8॥
 
Satyavati, who followed her husband, went to heaven with her body. The same extremely generous river appears in the form of Kaushiki and flows on this earth. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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