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श्लोक 1.34.23  |
रामोऽपि सहसौमित्रि: किंचिदागतविस्मय:।
प्रशस्य मुनिशार्दूलं निद्रां समुपसेवते॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| वह कथा सुनकर लक्ष्मण और श्री रामजी को बड़ा आश्चर्य हुआ और वे भी महर्षि विश्वामित्र की स्तुति करके सो गए॥ 23॥ |
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| After listening to that story, Lakshmana and Shri Ram were amazed. They too praised the great sage Vishwamitra and went to sleep.॥ 23॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे चतुस्त्रिंश: सर्ग:॥ ३४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें चौंतीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३४॥ |
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