श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 34: गाधि की उत्पत्ति, कौशिकी की प्रशंसा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.34.21 
विशेषेण भवानेव विश्वामित्र महायश:।
कौशिकी सरितां श्रेष्ठा कुलोद्योतकरी तव॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'हे पराक्रमी विश्वामित्र! आप अपने वंश में सर्वश्रेष्ठ संत हैं और नदियों में श्रेष्ठ कौशिकी भी आपके कुल का यश फैलाएगी।'
 
'O mighty Vishwamitra! You are the greatest saint in your lineage and the best of the rivers, Kaushiki, will also spread the glory of your clan.'
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd