श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 34: गाधि की उत्पत्ति, कौशिकी की प्रशंसा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.34.2 
इष्टॺां तु वर्तमानायां कुशनाभं महीपतिम्।
उवाच परमोदार: कुशो ब्रह्मसुतस्तदा॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस यज्ञ के समय परम दानी ब्रह्माकुमार महाराज कुषाण ने भूपाल कुशनाभ से कहा-॥ 2॥
 
At the time of that Yagya, the most generous Brahmakumar Maharaj Kushana said to Bhupal Kushanabha - ॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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