| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 1: बाल काण्ड » सर्ग 34: गाधि की उत्पत्ति, कौशिकी की प्रशंसा » श्लोक 17 |
|
| | | | श्लोक 1.34.17  | उत्तिष्ठते च शीतांशु: शशी लोकतमोनुद:।
ह्लादयन् प्राणिनां लोके मनांसि प्रभया स्वया॥ १७॥ | | | | | | अनुवाद | | सम्पूर्ण जगत् का अन्धकार दूर करने वाला शीतल प्रकाशमान चन्द्रमा अपनी प्रभा से जगत् के प्राणियों के हृदयों को आनन्द प्रदान करता हुआ उदित हो रहा है॥17॥ | | | | The cold shining moon, which dispels the darkness of the entire world, is rising with its radiance, giving joy to the hearts of the living beings of the world*॥ 17॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|