श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 34: गाधि की उत्पत्ति, कौशिकी की प्रशंसा  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.34.13 
एषा राम ममोत्पत्ति: स्वस्य वंशस्य कीर्तिता।
देशस्य हि महाबाहो यन्मां त्वं परिपृच्छसि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु श्री राम! आपके प्रश्न के उत्तर में मैंने आपको शोणभद्र के तट पर स्थित देश का परिचय देते हुए अपनी तथा अपने कुल की उत्पत्ति के विषय में बताया है।
 
Mahabahu Shri Ram! In reply to your question, I have told you about my and my clan's origins while introducing you to the country on the banks of Shonabhadra.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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