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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 34: गाधि की उत्पत्ति, कौशिकी की प्रशंसा
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श्लोक 10
श्लोक
1.34.10
ततोऽहं हिमवत्पार्श्वे वसामि नियत: सुखम्।
भगिन्यां स्नेहसंयुक्त: कौशिक्यां रघुनन्दन॥ १०॥
अनुवाद
हे रघुनन्दन! मुझे अपनी बहन कौशिकी से बहुत स्नेह है, इसलिए मैं हिमालय के निकट उसके तट पर नित्य सुखपूर्वक निवास करता हूँ।
Raghunandan! I have a lot of affection for my sister Kaushiki; therefore I regularly reside happily on her banks near the Himalayas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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