| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 1: बाल काण्ड » सर्ग 33: राजा कुशनाभ द्वारा कन्याओं के धैर्य एवं क्षमाशीलता की प्रशंसा, ब्रह्मदत्त की उत्पत्ति,कुशनाभ की कन्याओं का विवाह » श्लोक 8-9h |
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| | | | श्लोक 1.33.8-9h  | क्षमा दानं क्षमा सत्यं क्षमा यज्ञाश्च पुत्रिका:॥ ८॥
क्षमा यश: क्षमा धर्म: क्षमायां विष्ठितं जगत्। | | | | | | अनुवाद | | ‘पुत्रियों! क्षमा ही दान है, क्षमा ही सत्य है, क्षमा ही त्याग है, क्षमा ही यश है और क्षमा ही धर्म है, यह सारा संसार क्षमा पर ही आधारित है।’॥8 1/2॥ | | | | ‘Daughters! Forgiveness is charity, forgiveness is truth, forgiveness is sacrifice, forgiveness is fame and forgiveness is religion, this whole world is based on forgiveness.’॥ 8 1/2॥ | | ✨ ai-generated | | |
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