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ramayan 1.33.5: उनकी बातें सुनकर परम धर्मात्मा और प्रतापी राजा ने अपनी सौ श्रेष्ठ कन्याओं से इस प्रकार कहा-॥5॥   |   ramayan सर्ग 1.33: राजा कुशनाभ द्वारा कन्याओं के धैर्य एवं क्षमाशीलता की प्रशंसा, ब्रह्मदत्त की उत्पत्ति,कुशनाभ की कन्याओं का विवाह   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 33: राजा कुशनाभ द्वारा कन्याओं के धैर्य एवं क्षमाशीलता की प्रशंसा, ब्रह्मदत्त की उत्पत्ति,कुशनाभ की कन्याओं का विवाह  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.33.5 
तासां तु वचनं श्रुत्वा राजा परमधार्मिक:।
प्रत्युवाच महातेजा: कन्याशतमनुत्तमम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उनकी बातें सुनकर परम धर्मात्मा और प्रतापी राजा ने अपनी सौ श्रेष्ठ कन्याओं से इस प्रकार कहा-॥5॥
 
On hearing their words, the most virtuous and glorious king replied to his hundred most excellent daughters in the following manner:॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)