Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.33.11: उन्हीं दिनों चूलि नाम के एक प्रसिद्ध ऋषि, जो अत्यन्त तेजस्वी, सदाचारी एवं सदाचारी ऋषि (नैतिक ब्रह्मचारी) थे, वेदों के आधार पर तप का अनुष्ठान कर रहे थे (अथवा ब्रह्मचिंतन रूप तप में लगे हुए थे)। 11॥ | ramayan सर्ग 1.33: राजा कुशनाभ द्वारा कन्याओं के धैर्य एवं क्षमाशीलता की प्रशंसा, ब्रह्मदत्त की उत्पत्ति,कुशनाभ की कन्याओं का विवाह । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्हीं दिनों चूलि नाम के एक प्रसिद्ध ऋषि, जो अत्यन्त तेजस्वी, सदाचारी एवं सदाचारी ऋषि (नैतिक ब्रह्मचारी) थे, वेदों के आधार पर तप का अनुष्ठान कर रहे थे (अथवा ब्रह्मचिंतन रूप तप में लगे हुए थे)। 11॥
In those days, a famous sage named Chuli, a very brilliant, virtuous and virtuous sage (an ethical celibate) was performing the ritual of penance based on Vedas (or was engaged in penance in the form of thinking about Brahma). 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥