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ramayan 1.32.7: परम बुद्धिमान असुरतर्जस ने 'धर्मरण्य' नामक महान नगर की स्थापना की तथा राजा वसु ने 'गिरिवर्जा' नामक नगर की स्थापना की।   |   ramayan सर्ग 1.32: ब्रह्मपुत्र कुश पुत्रों का वर्णन, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से ‘कुब्जा’ होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 32: ब्रह्मपुत्र कुश पुत्रों का वर्णन, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से ‘कुब्जा’ होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.32.7 
असूर्तरजसो नाम धर्मारण्यं महामति:।
चक्रे पुरवरं राजा वसुनाम गिरिव्रजम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
परम बुद्धिमान असुरतर्जस ने 'धर्मरण्य' नामक महान नगर की स्थापना की तथा राजा वसु ने 'गिरिवर्जा' नामक नगर की स्थापना की।
 
The most intelligent Asurtarjasa founded a great city called 'Dharmaranya' and King Vasu founded the city of 'Girivarja'.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)