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ramayan 1.32.5: अपने पिता महाराज कुश्कि से यह बात सुनकर उन चारों लोकश्रेष्ठ राजकुमारों ने उस समय अपने लिए अलग-अलग नगरों का निर्माण किया ॥5॥   |   ramayan सर्ग 1.32: ब्रह्मपुत्र कुश पुत्रों का वर्णन, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से ‘कुब्जा’ होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 32: ब्रह्मपुत्र कुश पुत्रों का वर्णन, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से ‘कुब्जा’ होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.32.5 
कुशस्य वचनं श्रुत्वा चत्वारो लोकसत्तमा:।
निवेशं चक्रिरे सर्वे पुराणां नृवरास्तदा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अपने पिता महाराज कुश्कि से यह बात सुनकर उन चारों लोकश्रेष्ठ राजकुमारों ने उस समय अपने लिए अलग-अलग नगरों का निर्माण किया ॥5॥
 
Hearing this from their father Maharaj Kushki, those four worldly best princes built separate cities for themselves at that time. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)