Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.32.26: ‘पुत्रियों! क्या हुआ है? बताओ! कौन मनुष्य धर्म की अवहेलना कर रहा है? किसने तुम्हें कुबड़ी बना दिया है, जिसके कारण तुम दुःख भोग रही हो, परन्तु तुम कुछ नहीं कहतीं।’ ऐसा कहकर राजा ने गहरी साँस ली और उनका उत्तर सुनने के लिए ध्यानपूर्वक बैठ गए॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 1.32: ब्रह्मपुत्र कुश पुत्रों का वर्णन, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से ‘कुब्जा’ होना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 32: ब्रह्मपुत्र कुश पुत्रों का वर्णन, कुशनाभ की सौ कन्याओं का वायु के कोप से ‘कुब्जा’ होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.32.26 
किमिदं कथ्यतां पुत्र्य: को धर्ममवमन्यते।
कुब्जा: केन कृता: सर्वाश्चेष्टन्त्यो नाभिभाषथ।
एवं राजा विनि:श्वस्य समाधिं संदधे तत:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘पुत्रियों! क्या हुआ है? बताओ! कौन मनुष्य धर्म की अवहेलना कर रहा है? किसने तुम्हें कुबड़ी बना दिया है, जिसके कारण तुम दुःख भोग रही हो, परन्तु तुम कुछ नहीं कहतीं।’ ऐसा कहकर राजा ने गहरी साँस ली और उनका उत्तर सुनने के लिए ध्यानपूर्वक बैठ गए॥ 26॥
 
'Daughters! What has happened? Tell me. Which person is disregarding Dharma? Who made you hunchbacked, because of which you are suffering, but you are not telling anything.' Saying this, the king took a deep breath and sat attentively to hear their answer.॥ 26॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे द्वात्रिंश: सर्ग:॥ ३२॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें बत्तीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३२॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)