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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 31: श्रीराम, लक्ष्मण तथा ऋषियों सहित विश्वामित्र का मिथिला को प्रस्थान तथा मार्ग में संध्या के समय शोणभद्र तट पर विश्राम
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श्लोक 9
श्लोक
1.31.9
नास्य देवा न गन्धर्वा नासुरा न च राक्षसा:।
कर्तुमारोपणं शक्ता न कथंचन मानुषा:॥ ९॥
अनुवाद
मनुष्य तो क्या, देवता, गन्धर्व, दानव और राक्षस भी उसे पकड़ नहीं पाते॥9॥
‘Let alone humans, even the gods, Gandharvas, demons and devils are unable to get hold of it.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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