श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 31: श्रीराम, लक्ष्मण तथा ऋषियों सहित विश्वामित्र का मिथिला को प्रस्थान तथा मार्ग में संध्या के समय शोणभद्र तट पर विश्राम  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.31.7 
त्वं चैव नरशार्दूल सहास्माभिर्गमिष्यसि।
अद्भुतं च धनूरत्नं तत्र त्वं द्रष्टुमर्हसि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'पुरुषसिंह! तुम्हें भी हमारे साथ वहाँ चलना होगा। वहाँ एक बड़ा ही अद्भुत धनुषरत्न है। तुम्हें उसका दर्शन करना चाहिए।॥7॥
 
'Purushasingh! You too have to come with us there. There is a very wonderful Dhanushratna there. You should see it.॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)