श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 31: श्रीराम, लक्ष्मण तथा ऋषियों सहित विश्वामित्र का मिथिला को प्रस्थान तथा मार्ग में संध्या के समय शोणभद्र तट पर विश्राम  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.31.12 
तद्धि यज्ञफलं तेन मैथिलेनोत्तमं धनु:।
याचितं नरशार्दूल सुनाभं सर्वदैवतै:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! मिथिला के राजा ने अपने यज्ञ के पुरस्कार स्वरूप वह उत्तम धनुष माँगा था; अतः समस्त देवताओं और भगवान शंकर ने उन्हें वह धनुष प्रदान किया। उस धनुष का मध्य भाग जो मुट्ठी में पकड़ा जाता है, अत्यंत सुन्दर है॥12॥
 
‘O best of men! The king of Mithila had asked for that excellent bow as a reward for his sacrifice; therefore all the gods and Lord Shankar gave him that bow. The middle part of that bow which is held in the fist is very beautiful.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)