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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 30: श्रीराम द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तथा राक्षसों का संहार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.30.6 
उपासांचक्रतुर्वीरौ यत्तौ परमधन्विनौ।
ररक्षतुर्मुनिवरं विश्वामित्रमरिंदमौ॥ ६॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का दमन करने वाले वे महान धनुर्धर सदैव सतर्क रहते थे और ऋषि विश्वामित्र के पास खड़े होकर उनकी (तथा उनके यज्ञ की) रक्षा करते थे।
 
That great archer, who suppresses the enemies, always remained alert and stood near the sage Visvamitra and protected him (and his sacrifice).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)