Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.30.26: ‘महाबाहो! मैं तुम्हें पाकर बहुत धन्य हूँ। तुमने अपने गुरु की आज्ञा का पूर्णतः पालन किया है। महारथी! तुमने इस सिद्धाश्रम का नाम सार्थक कर दिया है।’ इस प्रकार श्री रामचन्द्रजी की स्तुति करके मुनि ने उन दोनों भाइयों के साथ संध्यावंदन किया॥ 26॥ | ramayan सर्ग 1.30: श्रीराम द्वारा विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा तथा राक्षसों का संहार । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृतार्थोऽस्मि महाबाहो कृतं गुरुवचस्त्वया।
सिद्धाश्रममिदं सत्यं कृतं वीर महायश:।
स हि रामं प्रशस्यैवं ताभ्यां संध्यामुपागमत्॥ २६॥
अनुवाद
‘महाबाहो! मैं तुम्हें पाकर बहुत धन्य हूँ। तुमने अपने गुरु की आज्ञा का पूर्णतः पालन किया है। महारथी! तुमने इस सिद्धाश्रम का नाम सार्थक कर दिया है।’ इस प्रकार श्री रामचन्द्रजी की स्तुति करके मुनि ने उन दोनों भाइयों के साथ संध्यावंदन किया॥ 26॥
'Mahabaho! I am very blessed to have you. You have obeyed the orders of your Guru completely. Great warrior! You have made the name of this Siddhashrama meaningful.' After praising Shri Ramchandra in this manner, the sage performed the evening prayers along with those two brothers.॥ 26॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे त्रिंश: सर्ग:॥ ३०॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें तीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥