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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 29: विश्वामित्रजी का श्रीराम से सिद्धाश्रम का पूर्ववृत्तान्त बताना और उन दोनों भाइयों के साथ अपने आश्रम पहुँचकर पूजित होना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.29.8 
ये चैनमभिवर्तन्ते याचितार इतस्तत:।
यच्च यत्र यथावच्च सर्वं तेभ्य: प्रयच्छति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
"इस समय जो भी भिखारी इधर-उधर से भिक्षा मांगने आते हैं, वे गौ, भूमि और सुवर्ण आदि धनों में से जो कुछ चाहते हैं, राजा बलि उन्हें वे सब वस्तुएं उसी रूप में प्रदान करते हैं॥8॥
 
"At this time whatever beggars come from here and there to beg, whatever they want from among the wealth such as cows, land and gold, King Bali offers them all those items in the same form. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)