श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 29: विश्वामित्रजी का श्रीराम से सिद्धाश्रम का पूर्ववृत्तान्त बताना और उन दोनों भाइयों के साथ अपने आश्रम पहुँचकर पूजित होना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  1.29.26-27 
तं दृष्ट्वा मुनय: सर्वे सिद्धाश्रमनिवासिन:।
उत्पत्योत्पत्य सहसा विश्वामित्रमपूजयन्॥ २६॥
यथार्हं चक्रिरे पूजां विश्वामित्राय धीमते।
तथैव राजपुत्राभ्यामकुर्वन्नतिथिक्रियाम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
विश्वामित्र को आते देख सिद्धाश्रम में रहने वाले सभी तपस्वी सहसा उछलते-कूदते और नाचते हुए उनके पास आए और उन्होंने मिलकर बुद्धिमान विश्वामित्र का विधिपूर्वक पूजन किया। इसी प्रकार उन्होंने उन दोनों राजकुमारों का भी अतिथि के रूप में स्वागत किया॥ 26-27॥
 
Seeing Vishwamitra coming, all the ascetics living in Siddhashrama suddenly came jumping and dancing to him and together they worshipped the wise Vishwamitra in the proper manner. In the same way they also welcomed those two princes as guests.॥ 26-27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)