श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 29: विश्वामित्रजी का श्रीराम से सिद्धाश्रम का पूर्ववृत्तान्त बताना और उन दोनों भाइयों के साथ अपने आश्रम पहुँचकर पूजित होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.29.24 
अद्य गच्छामहे राम सिद्धाश्रममनुत्तमम्।
तदाश्रमपदं तात तवाप्येतद् यथा मम॥ २४॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! अब हम उस परम उत्तम सिद्धाश्रम में पहुँच रहे हैं। पिताजी! वह आश्रम मेरा है, वैसे ही आपका भी है।'॥24॥
 
‘Shri Ram! Now we are reaching that most excellent Siddhashrama. Father! That ashram is yours as it is mine.'॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)