श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 29: विश्वामित्रजी का श्रीराम से सिद्धाश्रम का पूर्ववृत्तान्त बताना और उन दोनों भाइयों के साथ अपने आश्रम पहुँचकर पूजित होना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.29.2-3 
इह राम महाबाहो विष्णुर्देवनमस्कृत:।
वर्षाणि सुबहूनीह तथा युगशतानि च॥ २॥
तपश्चरणयोगार्थमुवास सुमहातपा:।
एष पूर्वाश्रमो राम वामनस्य महात्मन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महाबाहु श्री राम! प्राचीन काल में पूज्य भगवान विष्णु ने यहाँ अनेक वर्षों और सौ युगों तक तपस्या की थी। उन्होंने यहाँ घोर तपस्या की थी। यह स्थान महात्मा वामन का आश्रम था - जो श्री विष्णु का अवतार लेने से पूर्व वामन अवतार लेने के लिए तत्पर थे। 2-3॥
 
‘Mahabahu Shri Ram! In ancient times, the revered Lord Vishnu had resided here for penance for many years and hundred eras. He performed great penance here. This place was the ashram of Mahatma Vamana - who was ready to assume the Vamana incarnation, before assuming the incarnation of Shri Vishnu. 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)