श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 29: विश्वामित्रजी का श्रीराम से सिद्धाश्रम का पूर्ववृत्तान्त बताना और उन दोनों भाइयों के साथ अपने आश्रम पहुँचकर पूजित होना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.29.14 
तमुवाच हरि: प्रीत: कश्यपं गतकल्मषम्।
वरं वरय भद्रं ते वरार्होऽसि मतो मम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'काश्यपजी के समस्त पाप धुल गए। भगवान श्रीहरि अत्यंत प्रसन्न हुए और उनसे बोले - 'महर्षि! तुम्हारा कल्याण हो। तुम अपनी इच्छानुसार वर मांगो; क्योंकि मेरी दृष्टि में तुम वर पाने के योग्य हो।'
 
‘All the sins of Kashyapji were washed away. Lord Shri Hari became very happy and said to him - 'Maharshe! May you be well. You ask for a boon as per your wish; Because in my opinion you are worthy of getting a groom. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)