श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 29: विश्वामित्रजी का श्रीराम से सिद्धाश्रम का पूर्ववृत्तान्त बताना और उन दोनों भाइयों के साथ अपने आश्रम पहुँचकर पूजित होना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  1.29.10-11 
एतस्मिन्नन्तरे राम कश्यपोऽग्निसमप्रभ:।
अदित्या सहितो राम दीप्यमान इवौजसा॥ १०॥
देवीसहायो भगवान् दिव्यं वर्षसहस्रकम्।
व्रतं समाप्य वरदं तुष्टाव मधुसूदनम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! उसी समय अग्नि के समान तेजस्वी महर्षि कश्यप अपनी पत्नी अदिति के साथ अपने तेज से प्रकाशित होते हुए वहाँ आये। वे अदितिदेवी के साथ एक हजार दिव्य वर्षों से चले आ रहे महान व्रत का समापन करके आये थे। उन्होंने वर देने वाले मधुसूदन की इस प्रकार स्तुति की - 10-11॥
 
'Sriram! At the same time, Maharishi Kashyap, who was as bright as fire, came there glowing with his brilliance along with his wife Aditi. He had come after ending the great fast which had continued for a thousand divine years along with Aditidevi. He praised Madhusudan, the giver of blessings, in this manner: 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)