Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.26.2-3: 'प्रभो! अयोध्या में मेरे पिता महामना महाराज दशरथ ने अन्य गुरुजनों के बीच मुझे यह उपदेश दिया था कि 'पुत्र! अपने पिता के वचनों की लाज रखने के लिए तुम कुशिकनन्दन विश्वामित्र की आज्ञा का निःसंकोच पालन करो। उनकी बातों की कभी उपेक्षा मत करना।'   |   ramayan सर्ग 1.26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.26.2-3 
पितुर्वचननिर्देशात् पितुर्वचनगौरवात्।
वचनं कौशिकस्येति कर्तव्यमविशङ्कया॥ २॥
अनुशिष्टोऽस्म्ययोध्यायां गुरुमध्ये महात्मना।
पित्रा दशरथेनाहं नावज्ञेयं हि तद्वच:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'प्रभो! अयोध्या में मेरे पिता महामना महाराज दशरथ ने अन्य गुरुजनों के बीच मुझे यह उपदेश दिया था कि 'पुत्र! अपने पिता के वचनों की लाज रखने के लिए तुम कुशिकनन्दन विश्वामित्र की आज्ञा का निःसंकोच पालन करो। उनकी बातों की कभी उपेक्षा मत करना।'
 
'Lord! In Ayodhya, my father Mahamana Maharaj Dasarath had given me this advice among other teachers that 'Son! To keep the honor of your father's words, you follow the orders of Kushiknanandan Vishwamitra without any doubt. Never ignore his words.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)