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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 26: श्रीराम द्वारा ताटका का वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.26.13 
एवं ब्रुवाणे रामे तु ताटका क्रोधमूर्च्छिता।
उद्यम्य बाहुं गर्जन्ती राममेवाभ्यधावत॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जब श्रीराम इस प्रकार बोल रहे थे, तभी क्रोध से अचेत ताड़का वहाँ आ पहुँची, एक हाथ उठाकर गर्जना करती हुई उनकी ओर दौड़ी।
 
While Sri Rama was speaking in this manner, Tataka, unconscious with rage, arrived there, raised one arm and roared and rushed towards him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)