पूर्वमासीन्महायक्ष: सुकेतुर्नाम वीर्यवान्।
अनपत्य: शुभाचार: स च तेपे महत्तप:॥ ५॥
अनुवाद
प्राचीन काल की कथा है, सुकेतु नाम का एक महान यक्ष था। वह बहुत शक्तिशाली और गुणी था; किन्तु उसकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए उसने घोर तपस्या की।
‘It is a story of ancient times, there was a great Yaksha named Suketu. He was very powerful and virtuous; but he had no children; therefore he performed great penance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥