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ramayan 1.25.17: 'नरश्रेष्ठ! तुम्हें स्त्रियों को मारने का विचार करके उन पर दया नहीं करनी चाहिए। यदि राजा के पुत्र को चारों वर्णों के हित के लिए स्त्री को मारना भी पड़े, तो भी उससे विमुख नहीं होना चाहिए। 17॥   |   ramayan सर्ग 1.25: श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्रजी का ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग सुना ताटका-वध के लिये प्रेरित करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्रजी का ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग सुना ताटका-वध के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.25.17 
नहि ते स्त्रीवधकृते घृणा कार्या नरोत्तम।
चातुर्वर्ण्यहितार्थं हि कर्तव्यं राजसूनुना॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'नरश्रेष्ठ! तुम्हें स्त्रियों को मारने का विचार करके उन पर दया नहीं करनी चाहिए। यदि राजा के पुत्र को चारों वर्णों के हित के लिए स्त्री को मारना भी पड़े, तो भी उससे विमुख नहीं होना चाहिए। 17॥
 
'Narshrestha! You should not show mercy towards women by thinking of killing them. Even if a king's son has to kill a woman for the benefit of the four castes, one should not turn away from it. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)