श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम के पूछने पर विश्वामित्रजी का ताटका की उत्पत्ति, विवाह एवं शाप आदि का प्रसंग सुना ताटका-वध के लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.25.16 
नह्येनां शापसंसृष्टां कश्चिदुत्सहते पुमान्।
निहन्तुं त्रिषु लोकेषु त्वामृते रघुनन्दन॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे रघुकुल को सुख पहुँचाने वाले वीर! इस शापित जादूगर को मारने में आपके अतिरिक्त तीनों लोकों में कोई दूसरा पुरुष समर्थ नहीं है॥16॥
 
'The brave one who makes Raghu clan happy! There is no other man in the three worlds capable of killing this cursed magician except you. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)