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ramayan 1.24.20-21h: देवराज इन्द्र के शरीर से उत्पन्न मल और मैल को यह भूमि प्रदान कर देवतागण बहुत प्रसन्न हुए।   |   ramayan सर्ग 1.24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  1.24.20-21h 
इह भूम्यां मलं दत्त्वा देवा: कारूषमेव च॥ २०॥
शरीरजं महेन्द्रस्य ततो हर्षं प्रपेदिरे।
 
 
अनुवाद
देवराज इन्द्र के शरीर से उत्पन्न मल और मैल को यह भूमि प्रदान कर देवतागण बहुत प्रसन्न हुए।
 
The gods became very happy after being given this land the waste and dirt produced from the body of Devaraj Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)