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ramayan 1.24.11-12h: यह सुनकर दोनों परम धर्मात्मा भाइयों ने दोनों नदियों को प्रणाम किया और गंगा के दक्षिणी तट पर उतरकर वे दोनों भाई तीव्र गति से चलने लगे।   |   ramayan सर्ग 1.24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम और लक्ष्मण का गंगापार होते समय तुमुलध्वनि के विषय में प्रश्न, मलद, करूष एवं ताटका वन का परिचय  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  1.24.11-12h 
ताभ्यां तु तावुभौ कृत्वा प्रणाममतिधार्मिकौ॥ ११॥
तीरं दक्षिणमासाद्य जग्मतुर्लघुविक्रमौ।
 
 
अनुवाद
यह सुनकर दोनों परम धर्मात्मा भाइयों ने दोनों नदियों को प्रणाम किया और गंगा के दक्षिणी तट पर उतरकर वे दोनों भाई तीव्र गति से चलने लगे।
 
On hearing this, the two extremely pious brothers bowed to the two rivers and after landing on the southern bank of the Ganga, the two brothers began walking at a fast pace. 11 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)