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ramayan 1.23.6: संगम के निकट शुद्ध हृदय वाले महान ऋषियों का एक पवित्र आश्रम था, जहाँ वे हजारों वर्षों से घोर तपस्या कर रहे थे ॥6॥   |   ramayan सर्ग 1.23: विश्वामित्र सहित श्रीराम और लक्ष्मण का सरयू-गंगा संगम के समीप पुण्य आश्रम में रात को ठहरना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 23: विश्वामित्र सहित श्रीराम और लक्ष्मण का सरयू-गंगा संगम के समीप पुण्य आश्रम में रात को ठहरना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.23.6 
तत्राश्रमपदं पुण्यमृषीणां भावितात्मनाम्।
बहुवर्षसहस्राणि तप्यतां परमं तप:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
संगम के निकट शुद्ध हृदय वाले महान ऋषियों का एक पवित्र आश्रम था, जहाँ वे हजारों वर्षों से घोर तपस्या कर रहे थे ॥6॥
 
Near the Sangam there was a holy hermitage of great sages with pure hearts, where they had been practising intense penance for thousands of years. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)