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ramayan 1.23.3: महर्षि के ये अत्यन्त उदार वचन सुनकर उन दोनों वीरों ने स्नान करके देवताओं को तर्पण किया और फिर वे परम सुन्दर गायत्री मन्त्र का जप करने लगे॥3॥   |   ramayan सर्ग 1.23: विश्वामित्र सहित श्रीराम और लक्ष्मण का सरयू-गंगा संगम के समीप पुण्य आश्रम में रात को ठहरना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 23: विश्वामित्र सहित श्रीराम और लक्ष्मण का सरयू-गंगा संगम के समीप पुण्य आश्रम में रात को ठहरना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.23.3 
तस्यर्षे: परमोदारं वच: श्रुत्वा नरोत्तमौ।
स्नात्वा कृतोदकौ वीरौ जेपतु: परमं जपम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महर्षि के ये अत्यन्त उदार वचन सुनकर उन दोनों वीरों ने स्नान करके देवताओं को तर्पण किया और फिर वे परम सुन्दर गायत्री मन्त्र का जप करने लगे॥3॥
 
Hearing these very generous words of Maharishi, both of those brave men took bath and offered offerings to the gods and then they started chanting the most beautiful mantra, Gayatri. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)