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ramayan 1.23.18-19h: जब वे आपस में बातें कर रहे थे, तब उस आश्रम में रहने वाले ऋषिगण अपनी तपस्या से प्राप्त दूरदर्शिता के कारण उनके आगमन को जानकर अत्यन्त प्रसन्न हुए और उनके हृदय हर्ष और प्रसन्नता से भर गए॥18 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.23: विश्वामित्र सहित श्रीराम और लक्ष्मण का सरयू-गंगा संगम के समीप पुण्य आश्रम में रात को ठहरना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 23: विश्वामित्र सहित श्रीराम और लक्ष्मण का सरयू-गंगा संगम के समीप पुण्य आश्रम में रात को ठहरना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  1.23.18-19h 
तेषां संवदतां तत्र तपोदीर्घेण चक्षुषा॥ १८॥
विज्ञाय परमप्रीता मुनयो हर्षमागमन्।
 
 
अनुवाद
जब वे आपस में बातें कर रहे थे, तब उस आश्रम में रहने वाले ऋषिगण अपनी तपस्या से प्राप्त दूरदर्शिता के कारण उनके आगमन को जानकर अत्यन्त प्रसन्न हुए और उनके हृदय हर्ष और प्रसन्नता से भर गए॥18 1/2॥
 
While they were talking to each other, the sages residing in that hermitage were very pleased to know about their arrival through the farsightedness they had acquired through austerities. Their hearts were filled with joy and delight.॥18 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)