श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 22: दशरथ का स्वस्तिवाचन पूर्वक राम-लक्ष्मण को मुनि के साथ भेजना, विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति  »  श्लोक 9-11h
 
 
श्लोक  1.22.9-11h 
तदा कुशिकपुत्रं तु धनुष्पाणी स्वलंकृतौ।
बद्धगोधांगुलित्राणौ खड्गवन्तौ महाद्युती॥ ९॥
कुमारौ चारुवपुषौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।
अनुयातौ श्रिया दीप्तौ शोभयेतामनिन्दितौ॥ १०॥
स्थाणुं देवमिवाचिन्त्यं कुमाराविव पावकी।
 
 
अनुवाद
दोनों भाई कुमार श्रीराम और लक्ष्मण वस्त्राभूषणों से सुसज्जित थे। उनके हाथों में धनुष थे। उन्होंने अपनी अंगुलियों में गोचर्म के दस्ताने पहने हुए थे। उनकी कमर में तलवारें लटक रही थीं। उनके अंग अत्यन्त सुन्दर थे। वे महान् तेजस्वी योद्धा अद्भुत तेज से चमकते हुए अपनी शोभा सर्वत्र फैला रहे थे और कुशिकपुत्र विश्वामित्र के पीछे-पीछे चल रहे थे। उस समय वे दोनों योद्धा अकल्पनीय शक्तिशाली स्थाणुदेव (महादेव) के पीछे-पीछे चलने वाले दो अग्निकुमारों स्कन्द और विशाखा के समान शोभा पा रहे थे।
 
Both the brothers Kumar Shri Ram and Lakshman were well adorned with clothes and ornaments. They had bows in their hands. They wore gloves made of cowhide leather on their fingers. Swords were hanging from their waists. Their body parts were very beautiful. Those great and brilliant warriors were shining with amazing radiance and spreading their beauty everywhere and were following Kushik's son Vishwamitra. At that time, both the warriors looked beautiful like two Agnikumars Skanda and Vishakha walking behind the inconceivably powerful Sthanudev (Mahadev).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)