श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 22: दशरथ का स्वस्तिवाचन पूर्वक राम-लक्ष्मण को मुनि के साथ भेजना, विश्वामित्र से बला और अतिबला नामक विद्या की प्राप्ति  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.22.7 
कलापिनौ धनुष्पाणी शोभयानौ दिशो दश।
विश्वामित्रं महात्मानं त्रिशीर्षाविव पन्नगौ॥ ७॥
 
 
अनुवाद
दोनों भाइयों की पीठ पर तरकश बंधे हुए थे। उनके हाथों में धनुष सुशोभित थे और वे दोनों महात्मा विश्वामित्र के पीछे-पीछे दसों दिशाओं को सुशोभित करते हुए चल रहे थे, मानो तीन-तीन फनों वाले दो सर्प हों। एक कंधे पर धनुष, दूसरी ओर पीठ पर तरकश और बीच में सिर - इन तीनों की तुलना तीन फनों से की गई है।
 
Both the brothers had quivers tied on their backs. Bows were adorning their hands and both of them were walking behind Mahatma Vishwamitra, beautifying all the ten directions, like two serpents having three hoods each. Bow on one shoulder, quiver on the other side on the back and head in the middle - these three have been compared with three hoods.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)